देवाश्रम धर्मसंघ

"धर्मो रक्षति रक्षितः"


घोषणा पत्र



"देवाश्रम धर्मसंघ" अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक संस्था देवाश्रम ट्रस्ट द्वारा संचालित संस्था है। इस धर्मसंघ का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र के युवाओं को मानसिक, शारीरिक, शैक्षणिक, आर्थिक व आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ, सशक्त, सुदृढ़ व संस्कारिक बनाकर स्वर्णिम राष्ट्र के निर्माण की मुख्यधारा में जोड़ना है।

देवाश्रम धर्मसंघ का प्रमुख उद्देश्य- भारत एक महान देश है। भारत में रहने वाले हर नागरिक गौरवशाली व देश के प्रति समर्पित हैं। "देवाश्रम धर्मसंघ" संगठन को राष्ट्रहित, समाजहित व जनहित के कार्यों को करने के लिए 15 प्रमुख उद्देश्यों में विभक्त किया गया है:-

1. राष्ट्र, राष्ट्रीयता व राष्ट्रधर्म- राष्ट्र धर्म सर्वोपरि धर्म है। राष्ट्रीय विचार- ''सशक्त नागरिक, सशक्त लोकतंत्र, सशक्त राष्ट्र में मानव धर्म और राष्ट्र धर्म में नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।'' हमारी स्वतंत्रता किसी दूसरे की स्वतंत्रता वाधित न करे, हमारे विचार किसी वर्ग, धर्म, संस्कृति, सभ्यता, समुदाय को आहत न करे, सभी धर्मों का सम्मान करके जीवन में राष्ट्रधर्म सर्वोपरि माने, तभी हम सभी का गौरव बढेगा, और सशक्त राष्ट्र की परिकल्पना साकार रूप ले सकेगी। युवाओं को राष्ट्रीय विचार धारा की ओर आकर्षित करना और देश में फैल रहे कटुुतावादी विचारों से दूर करके प्रेम और सद्भावना बढ़ाने के लिए सकारात्मक पहल करना एक मूल उद्देश्य है।

2. शिक्षा, ज्ञान व चरित्र निर्माण- मनुष्य के जीवन में शिक्षा और ज्ञान का बहुत महत्व है। ज्ञान की सहायता से ही नैतिक तथा चारित्रिक निर्माण के उद्देश्य को पूरा किया जा सकता है। शिक्षा के द्वारा ही संस्कृति और संस्कार का विकास होता है। देवाश्रम धर्मसंघ रोजगारपरक शिक्षा के साथ-साथ पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से नैतिक व संस्कारित शिक्षा सम्मिलित करना तथा गांव-गांव गुरुकुल पद्धति पर स्कूल व विद्यालय की स्थापना कर, योग्य व अनुभवी अध्यापकों द्वारा शिक्षण व प्रशिक्षण का प्रचार प्रसार हेतु कृतसंकल्प है।

3. चिकित्सा, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण- स्वास्थ्य सभी के लिए अति आवश्यक है। सभी नागरिकों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं निःशुल्क मुहैया कराने के उद्देश्य से देवाश्रम धर्मसंघ भारतीय चिकित्सा पद्धति, आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा आदि की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं, परियोजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी जन-जन तक पहुँचाने का यथा संभव प्रयास करेगी।

4. कृषि उद्योग व विकास- किसानों, उद्योगों, दलितों, अल्पसंख्यकों, कामगारों, महिलाओं के हितो के साथ-साथ देश के 20 फीसदी अति गरीब परिवारों को आर्थिक रुप से अतिसुदृढ़ बनाना।

5. महिला सम्मान व सुरक्षा- "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता"। बचपन से ही लड़को में वो संस्कार देना जो उन्हें महिलाओ के प्रति सम्मान करना सिखाये। गांव-गांव महिला डेस्क, महिला हेल्पलाइन खुलवाना, पोर्न साइड को 100 प्रतिशत बंद कराना तथा दहेज प्रथा व महिलाओं के उत्पीड़न बंद कराना।

6. गो-हत्या व कन्या भ्रूण हत्या- हर शहर तथा गांव-गांव लोंगो को धर्म तथा अहिंसा परमो धर्म: के प्रति धर्मगुरुओं व प्रवचनों आदि के माध्यम से जागरूक करना।

7. नशा छोड़ो भारत जोड़ो- पूरे देश में गुटका, सिगरेट व शराबबंदी लागू कराने हेतु सरकार से मांग करना व नशा निर्व्यसन हेतु युवाओं को जागृति करना।

8. बेरोजगार मुक्त भारत- रोजगार प्रशिक्षण व स्वावलंबन योजनान्तर्गत शिक्षित बेराजगारों को रोजगार परक शिक्षा देकर रोजी-रोजगार प्रदान करना तथा बेरोजगार मुक्त भारत बनाना।

9. भ्रष्टाचार मुक्त भारत- सिटिज़न चार्टर नियम द्वारा सभी सरकारी कार्यों का निष्पादन निष्पक्ष व पारदर्शिता पूर्वक सही, समयबद्ध और सेवाभाव से करना।

10. निःशुल्क शिक्षा, स्वास्थ्य व न्याय व्यवस्था- आर्थिक रूप से अति गरीब, असहाय, असंगठित श्रमिकों व दिव्यांग लोगों को निःशुल्क शिक्षा, स्वास्थ्य व न्याय प्रदान करना।

11. कृषक समृद्धि योजना- पाँच एकड़ तथा दो बच्चे से कम किसान के परिवार के एक व्यक्ति को योग्यतानुसार सरकारी नौकरी देना।

12. स्मार्ट गोशाला- गौ संरक्षण व संवर्धन हेतु हर जिले में स्मार्ट गोशाला खुलवाना। जिससे सौर ऊर्जा, बायो-फ़र्टिलाइज़र, सीएनजी, गौमूत्र व गोबर से लाइलाज रोगों की दवा बनाना।

13. हर हाथ को काम हर खेत को पानी- बड़ी नदियों की नेटवर्किंग द्वारा हर खेत को सिचाई हेतु पानी उपलब्ध कराना व आर्गेनिक फार्मिंग, औषधीय खेती, फ्लोरीकल्चर व इकोनोमिक क्रॉप उत्पादन द्वारा ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देना।

14. स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण- अपने आस पास को स्वच्छ रखें, ग्राम को खुला में शौच मुक्त बनाने के लिए ग्रामीणों को संदेश दे पर्यावरण के संरक्षण के लिए संकल्प लें बेटियों की शिक्षा व संरक्षण के लिए माहौल बनाएं प्रत्येक व्यक्ति कम से कम हर वर्ष 5 पेड़ अवश्य लगाए इत्यादि हेतु रैली व पोस्टर आदि द्वारा लोगों को जागरूक करना।।

15. वरिष्ठ नागरिक व पूर्व सैनिक सम्मान- परिवार से विरक्त बुजुर्गों के निवास के लिए प्रत्येक शहर में एक आधुनिक सभी सुविधायुक्त ओल्ड एज होम की स्थापना करना। प्रतिवर्ष समारोह आयोजित कर वरिष्ठ नागरिक, पूर्व सैनिक व शहीदों की धर्मपत्नियों का सम्मान करना।


राष्ट्रसेवा व समाजसेवा हेतु अपना कर्तव्य निभाना देश के हर नागरिक का परम कर्तव्य है। हमारा सौभाग्य है कि हम देशसेवा व समाजसेवा के कार्य में अपना-अपना योगदान व सहयोग दें, तो हम भारत की उन्नति, विकास व सुरक्षा में अपनी भागीदारी निभा सकते हैं और अपने देश को समृद्ध, सुदृढ़ व सम्पन्न बना सकते हैं। यह तभी सम्भव है जब हम देवाश्रम धर्मसंघ के उद्देश्यों की विशेषता व उद्देश्यों के अनुसार सही सोच, सही दिशा, सही गति, सही ऊर्जा व सही सामर्थ के साथ अपने-अपने कर्तव्यों को निभायें तो अवश्य ही हमारा भारत बदलेगा और भारत विश्वगुरु बनेगा।

देवाश्रम धर्मसंघ के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए हम सभीं भारतीयों को संगठित होकर कदम से कदम मिलाकर चलना होगा। हर उद्देश्य की अपने-अपने क्षेत्र में भूमिका महत्वपूर्ण है। उन उद्देश्य को पूरा करने के लिए भारत के हर गाँव, हर शहर तक देवाश्रम धर्मसंघ की सेवाओं को पहुँचाना होगा जिससे हमारे देश के अधिक से अधिक युवाओं, बेरोजगारों व किसानों आदि को लाभ मिलें। हम मानते हैं कि ये लक्ष्य कड़ी प्रतिस्पर्धा से भरे हैं तथा कठिन संघर्ष, संगठनात्मक प्रयत्न, रचनात्मक कोशिश, जन-जन की भागीदारी, योगदान व सहयोग से ही हासिल किया जा सकता है।

हम सभी भारतीयों को तन-मन व धन से देवाश्रम धर्मसंघ के संगठन को सहयोग देना चाहिए क्योंकि यह संगठन पूर्ण रूप से देशवासियों के प्रति समर्पित है। ‘‘हमारे और आपके सहयोग से’’ सवा सौ करोड़ भारतीयों तक संगठन की सेवाएं भलीभाँति पहुँच सके। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए संगठन को 11 प्रकोष्ठों व 8 स्तरों में विभक्त किया गया है:-


ग्यारह प्रकोष्ठ: प्रबुद्ध प्रकोष्ठ, महिला प्रकोष्ठ, युवा प्रकोष्ठ, सांस्कृतिक प्रकोष्ठ, खेलकूद प्रकोष्ठ, उद्योग-व्यापार प्रकोष्ठ, शैक्षणिक प्रकोष्ठ, स्वास्थ्य व चिकित्सा प्रकोष्ठ, विधि प्रकोष्ठ, श्रम प्रकोष्ठ, विदेश प्रकोष्ठ।

इसी लक्ष्य की प्राप्ति हेतु आप सभी आदरणीय प्रबुद्धजनों के सुझाव व विचार आमंत्रित हैं। "देवाश्रम धर्मसंघ" के साथ जुड़कर आप विभिन्न प्रकार से स्वर्णिम राष्ट्र निर्माण में सहयोग करने का सुनहरा अवसर प्राप्त कर सकते हैं।

आध्यात्मिक गुरु विश्वशांति प्रणेता परम पावन डॉ० ब्रजनंदन जी महाराज जैसे विश्वसंत के विचारों के साथ किस तरह स्वर्णिम राष्ट्र निर्माण सम्भव है। यह जानने हेतु जल्द से जल्द "देवाश्रम धर्मसंघ" से जुड़े।


नई दिल्ली के देवाश्रम शिविर में आयोजित देवाश्रम धर्मसंघ के आध्यात्मिक गुरु परम पावन डॉ० ब्रजनंदन जी महाराज (परमाध्यक्ष, देवाश्रम धर्मसंघ व देवाश्रम ट्रस्ट) की अध्यक्षता की मासिक समीक्षा बैठक में विश्वशांति, विश्वकल्याण, विश्वसौहार्दता व विश्ववन्धुत्व हेतु निर्णय लिया गया कि सबसे बड़ा मानव धर्म है। हम सब एक ही ईश्वर के संतान हैं। सभी धर्मों के लोग आपस मे भाई-भाई हैं। अतः सभी धर्म व जाति के लोगों को आपसी कटुता, वैमनस्यता, भेद-भाव व द्वेष भूलाकर विश्वशांति व मानव कल्याण के लिए प्रमुखतापूर्वक आगे आकर पहल करना चाहिए।

बुधवार को मासिक समीक्षा बैठक में प्रवर धर्माधीश विश्वसन्त परमाराध्य स्वामी डॉ० ब्रजनंदन जी महाराज ने कहा कि “देवाश्रम धर्मसंघ” सर्वे भवन्तु सुखिनः के सिद्धान्त पर सभी धर्मों के प्रबुद्धजनों साधु-संतों, सूफी-उलेमाओं, ग्रंथियों, लामाओं, मौलवियों, पादरियों, मुनियों, सिद्धों आदि को एक प्लेटफॉर्म पर लाने का सतत प्रयास कर रही है। राष्ट्रीय एकता-अखंडता, सौहार्दता, श्रीराम जन्मभूमि निर्माण मार्गदर्शक मंडल, गौमाता-सेवा संरक्षण व सम्वर्धन (स्मार्ट गोशाला), गंगा-यमुना की अविरलता और निर्मलता, वैदिक कृषि अनुसंधान, सौर ऊर्जा, पर्यावरण, स्वास्थ्य, आयुर्वेद व योग तथा लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों के अनुष्ठान समेत सभी प्रदेशों में “देवाश्रम धर्मसंघ” का विशाल सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिसके कार्यकारिणी का पुनर्गठन व सदस्यता हेतु आवेदन पत्र भरने की तारीख 1 जनवरी 2020 से निःशुल्क ऑनलाइन www.devashramtrust.org द्वारा भेजनें का कर दिया गया है।


दिल्ली के धर्माधीश योगी धनंजय महाराज व प्रवर संत ओम भारती ने देवाश्रम धर्मसंघ का एक सम्मेलन व यज्ञ-अनुष्ठान विश्वविख्यात प्रमुख तीर्थ-स्थल बोध गया (विहार) में बोध गया मठ के विशाल परिसर में करने का पूर्ण सहयोग के साथ निमंत्रण दिया। मध्य प्रदेश के प्रख्यात संत स्वामी ओम शंकर ने भोपाल के सुप्रसिद्ध माँ कात्यायनी मंदिर परिसर को इस महान पुनीत कार्य व पूर्ण व्यवस्था हेतु देवाश्रम ट्रस्ट को समर्पित किया।

उत्तर प्रदेश (अयोध्या-साकेत) के प्रमुख धर्मनिष्ठ व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अनुराग शंकर दुबे ने अहोभाव से श्रीराम जन्मभूमि शिघ्र निर्माण हेतु “श्रीराम जन्मभूमि निर्माण मार्गदर्शक मंडल” की प्रस्तावना कर विश्वसन्त स्वामी डॉ० ब्रजनंदन जी महाराज को मार्गदर्शक मंडल का परमाध्यक्ष की जिम्मेदारी तथा अयोध्या में एक श्रीराम राष्ट्ररक्षा महायज्ञ करने हेतु प्रस्तावित किया। दिल्ली दक्षिणी के कोऑर्डिनेटर चाहतराम व दिल्ली सेंट्रल के अध्यक्ष मुकेश मिश्रा ने दिल्ली में पवित्र श्रावण माह में “महारुद्र चंडी व लक्ष्मी नारायण याज्ञ” हेतु प्रस्तावित किया। जिसका सभा में उपस्थित सभी संतो, प्रबुद्धजनों व आचार्यों ने सर्वसम्मति करतलध्वनि से हर्षातिरेक पारित किया।