DEVASHRAM TRUST 
Shiva Blessing Meets Parthiv Shivalinga Poojan
(World Welfare, World Peace and Salvation)
 


 Parthiv Shivling Poojan has special significance in Shiv Pujan in Kaliyug. Worship it Shiva's grace is always maintained on the devotees. Achievement glory in this folk Along with death, life after death is attained through the dizziness of life.

 For the removal of Kalsarp and Pitrodhas - Parthiv Shivaling for the purpose of elimination of Kalsarp and Pitriodosh along with meaning, religion, work, salvation Abhishek is considered to be the best. One Cores Twenty-five Lakhs Parthiv Shivling in the life of man more for good luck, peace, health and safety by worship or mere philosophy Fortunately. Increase in food grains, defeat of enemies, high posting status, offspring Happiness, goodwill and happy life and companionship benefits, longevity and achievement of respect, all Increasing happiness in prosperity, etc., is getting quick profit. Special consecration of Shiva worship by making Parthiv Shivling in Shravan or Kartik month Siva worshipers get it. Parthiv Pooja, the first son of Kushmad Rishi in Kaliyug The Pavilion did. For the welfare of the world on the order of the Lord, they are Parthiv Shivaling after making Shiva do the archana. During Shiva Archana, worship the auspicious and worship it. Rudraksh Put on hold and be consumed. If you do not get any type of soil then you can put triplet on the forehead are there.

 Make Parthiv Shivling from Mud and Cow Dung:- Parthiv Shivaling should be constructed before worshiping the scriptures. Its for making mud, cow dung, jaggery, butter and semolina, make Shivling. Keep in mind that in the construction of Shivling, it is not higher than 12 fingers. Parthive Shivling worshiping is not attained if it is higher than this. While making the 'Oo Naam Shivay:' should be sprayed with mantras.

 108 Belpetra and five kilos of bhog for the fulfillment of desire; For devotees to fulfill their wish, 108 Belpetra and five kilograms Bhog on Shivling should be plated. Also, keep in mind that touching the Prasad Shivling, do not accept it. For this, accept offerings from Shivalinga touch.

 Worship material- For milk, curd, bura, honey, ghee. Gangajal, Chandan, Kamal Gatta, Black Sesame, Offer rice, incense, barley, belpetra, cannabis, dhatura, cardamom flower etc. Afterwards do the aarti of Bhole Baba. At the end, apolise for any mistake in puja.

|| Om Namah Shivaya ||


DEVASHRAM TRUST 
पार्थिव शिवलिंग पूजन से मिलती है शिवकृपा
(विश्वकल्याण, विश्वशांति व मोक्षप्राप्ति)
 


 कलयुग में शिवपूजन में पार्थिव शिवलिंग पूजन का विशेष महत्व है। इसका पूजन करने वाले भक्तों पर सदैव शिव कृपा बनी रहती है। इस लोक में यश वैभव प्राप्त करने के साथ ही मृत्यु उपरांत जीवन मरण के चक्कर से मुक्ति पा जाते हैं।

 कालसर्प व पितृदोष निवारण हेतु - अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष के साथ-साथ कालसर्प व पितृदोष निवारण हेतु पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक सर्वोत्म माना गया है। मनुष्य के जीवन में सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग का पूजन अथवा मात्र दर्शन से सौभाग्य, शान्ति, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए अधिक सौभाग्यशाली है। धन-धान्य में बढ़ोत्तरी, शत्रुओं का पराजय, उच्च पद प्रतिष्ठा, संतान सुख, वैबाहिक सुखमय जीवन व दाम्पत्य लाभ, दीर्घायु व सम्मान की प्राप्ति, समस्त सुख-समृद्धि में वृद्धि आदि का शीघ्र लाभ प्राप्त होने लगता है| श्रावण या कार्तिक माह में पार्थिव शिवलिंग बनाकर शिव पूजन का विशेष पुण्य शिवभक्तों को मिलता है। कलयुग में सबसे पहले पार्थिव पूजन कूष्माड ऋषि के पुत्र मंडप ने किया। प्रभु के आदेश पर जगत के कल्याण के लिए उन्होंने पार्थिव शिवलिंग बनाकर शिव अर्चन किया। शिव अर्चना के दौरान उत्तराभिमुख होकर पूजन करें। रुद्राक्ष धारण कर भस्म लगाए। भस्म नहीं मिलने पर मिट्टी का त्रिपुंड माथे पर लगा सकते हैं।

 मिट्टी और गऊ गोबर से बनाएं पार्थिव शिवलिंग- शास्त्रानुसार पूजन करने से पहले पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करना चाहिए। इसके लिए मिट्टी, गऊ का गोबर, गुड़, मक्खन और भस्म मिलाकर शिवलिंग बनाए। शिवलिंग के निर्माण में इस बात का ध्यान रखें कि यह 12 अंगुल से ऊंचा नहीं हो। इससे अधिक ऊंचा होने पर पार्थिव लिंग पूजन का पुण्य प्राप्त नहीं होता है। इसे बनाने के बाद “ऊँ शिवाय नम:” मंत्र से शिवार्चना करनी चाहिए।s

 मनोकामना पूर्ति हेतु चढ़ाए 108 बेलपत्र व पांच किलो भोग- भक्तों को मनोकामना पूर्ति के लिए शिवलिंग पर 108 बेलपत्र व पांच किलो प्रसाद चढ़ाना चाहिए। साथ ही इस बात का ध्यान रहे कि जो प्रसाद शिवलिंग से स्पर्श कर जाए, उसे ग्रहण नहीं करें। इसके लिए शिवलिंग स्पर्श से दूर प्रसाद को ग्रहण करें।

 पूजन सामग्री- दूध, दही, बूरा, शहद, घी अभिषेक के लिए। गंगाजल, चंदन, कमल गट्टे, काले तिल, साठी के चावल, धूप, जौ, बेल पत्र, भांग, धतूरा, मदार पुष्प, समी पत्र, अर्पण करें। इसके बाद भोले बाबा की आरती करें। अंत में बर्फी, खीर या बताशों से भोग लगाकर क्षमा याचना करें।

||ॐ नमः शिवाय||